कार्यक्रम(कहानी)
लोकतंत्र में समस्या बढ़ी मतलब कुछ गलत हुवा है। और इस गलत को छुपाया जा रहा है। बात चूहों के देश की है। यहाँ सरकार गलती छुपवाने के लिए ,अपने पैसे से मतलब अपने पैसे से मनोरंजक कार्यक्रम करवाये। ताकि समस्या से ध्यान हट सके और जनता को आराम मिल सके।सरकार ने जनता को उम्रों के हिसाब से तीन भागो में बाट दिया।
कार्यक्रम के लिए विद्वान् और बूढ़े चूहों को पैसा और सम्मान देकर बुला लिया। कार्यक्रम चमक-दमक से शुरू हुआ। विद्वान् चूहे चुप रहे ,उन्हें बाहर का वातावरण प्रभावित नहीं करता है। विद्वान् चूहों को जरा बोलने का मौका क्या मिला, उन्होंने सरकार की गलतियों का बखान प्रारंभ कर दिया।
सूत्रधार हैरान -परेशान वह कभी परस्थिति को संभालते तो कभी स्वयं को। पर अंत में सूत्रधार चूहें को बोलना पढ़ा -भाई चूहों ये सरकारी पैसों से चलने वाला कार्यक्रम है। आप सरकार के लिए कुछ न बोले।
पर सैलाब को कोई रोक पाया है। दबी आवाज़ जोर से ही निकलती है। माहौल बिगड़ा और सरकार को बात पता चल गई। रात तक कार्यक्रम होने दिया। और दिन निकलने से पहले ही विद्वान् चूहों राष्ट्रद्रोह (सरकारद्रोह ) का आरोप लगाकर जेलो में ठूँस दिया।
छोटे चूहें अपने कार्यक्रमों (टीवी , खेल ) में लगे थे। जवान चूहे अपनी मस्ती में चूर ( अपने कार्यक्रमों)
थे।
कार्यक्रम के लिए विद्वान् और बूढ़े चूहों को पैसा और सम्मान देकर बुला लिया। कार्यक्रम चमक-दमक से शुरू हुआ। विद्वान् चूहे चुप रहे ,उन्हें बाहर का वातावरण प्रभावित नहीं करता है। विद्वान् चूहों को जरा बोलने का मौका क्या मिला, उन्होंने सरकार की गलतियों का बखान प्रारंभ कर दिया।
सूत्रधार हैरान -परेशान वह कभी परस्थिति को संभालते तो कभी स्वयं को। पर अंत में सूत्रधार चूहें को बोलना पढ़ा -भाई चूहों ये सरकारी पैसों से चलने वाला कार्यक्रम है। आप सरकार के लिए कुछ न बोले।
पर सैलाब को कोई रोक पाया है। दबी आवाज़ जोर से ही निकलती है। माहौल बिगड़ा और सरकार को बात पता चल गई। रात तक कार्यक्रम होने दिया। और दिन निकलने से पहले ही विद्वान् चूहों राष्ट्रद्रोह (सरकारद्रोह ) का आरोप लगाकर जेलो में ठूँस दिया।
छोटे चूहें अपने कार्यक्रमों (टीवी , खेल ) में लगे थे। जवान चूहे अपनी मस्ती में चूर ( अपने कार्यक्रमों)
थे।
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