शिक्षा ,आप क्या सिखा रहे हैं?
यह सोचने का विषय हैं । हमें स्थिर भी रहना हैं।
आप क्या सीख रहे हैं ?शिक्षा, नागरिक जीवन तैयार करती हैं।
नागरिक जीवन ही जीवन है, तो फिर मुश्किले बढना हैं।
जीवन सिखाया नहीं जा सकता हैं। जीवन तो जीया जाता हैं।
जीवन तो कला , अनुभव , ज्ञान,उत्सव,आनंद,मुक्त, स्वतंत्र हैं।
दौड़ ,संघर्ष, प्रतिस्पर्धा, शिक्षा है,तो यह चिंता का विषय हैं।हम हमारे चक्रव्यूह में स्वयं फंसते जाते है और
x
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें