लोकतंत्र
लोकतंत्र में लोग न हो तो तंत्र बेकार है ! लोकतंत्र में एहसास न हो तो तंत्र बेकार है !
लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच विषमता हो तो वह तानाशाह कहलाता है !
लोकतंत्र एक सरल प्रक्रिया नहीं है ,इसमे काफी समय और श्रम लगता है !
लोकतंत्र को एक दिशा की आवश्यकता होती है !
लोकतंत्र में राजनीति की कोई जगह नही होती है !
लोकतंत्र का मतलब चुने हुए व्यक्तियों को दिया कुछ समय जिसमे वह जीवन का सर्वोच्च कर सके!
लोकतंत्र का मतलब भीड़ नहीं होती है !
लोकतंत्र दल -दलों का नाम नही है !
दल -दलों में घँसता लोकतंत्र चिंता का विषय है !
लोकतंत्र के स्थापना के बाद समस्या स्वतः समाप्त हो जाती है !
लोकतंत्र एक शक्ति है !
लोकतंत्र की कहानियाँ :-
अ -ब -स
एक शहर है, आम शहर है, जनता है, पर कैसी ? हम वर्गीकृत करे तो तीन प्रकार के -पहला -आँख वाले ,दूसरा -बिना आँख वाले ,तीसरा -एक आँख वाले !अब तीन तरह के लोगो में बंटा शहर कुछ विचित्र लगता है !ये लोग आपस में बढ़िया रहते थे ,एक दिन इन्होने सोचा अपना विकास किया जाये !
हम शहर को दिशा देने के लिए लोकतंत्र की स्थापना करते है !चुनाव माध्यम बना, लोकतंत्र की स्थापना का और चुने हुए लोग सरकार कहलाएँगे !काम करने की समयावधि भी तय कर दी गई !
चुनाव हुए निर्णय आया एक आँख वाले जनता में काँमन थे ,तो बहुमत मिला और शपथ ली ,बन गई सरकार ! पहले -पहले तो खूब बढ़िया चला ,पर समय समाप्त होने को आया ! अब एक आँख वाली सरकार घबराई !
उन्होंने एक रास्ता निकला और कहा हम एक विधान लाना चाहते है ,जिससे सरकार चलना आसान हो! और उन्होंने आखिर कर एक विधान बना भी दिया !विधान था समता का !
विधान बोलता है -कि जनता में समता होनी चाहिए !अगर समता न हो तो सरकार चलना कठिन होता है ! विकास करना कठिन होता है !
फिर इसे जनता पर लागू किया गया !- बिना आँख वालो की आँख तो आ सकती नहीं थी !वरन उन्होंने गर्म सलाखों से एक आँख वालो के आँख फोड़ने का काम शुरू करवा दिया !
भी कुछ आँख वालो ने आँख बंद कर आँख न होने का नाटक कर बच लिए ,ये थे ,शहर के विद्वान !
अब ये भी सरकार की शक्ति समझ चुके थे ,इसलिए भाट -चारण बन गए !समय बिता दूसरा चुनाव सामने था ,अब क्या ? अब एक आँख वाली सरकार फिर घबराई !
उन्होंने एक रास्ता और निकला वायदा बनाया -कि हमने एक काम आधा किया ,पर जब तक आप आगे मौका दे तो हम काम पूरा करके दे !समता तो हमने कर दी ,अब सेवक विभाग बना कर देंगे !जनता खुश -बना दी फिर से एक आँख वाली सरकार!
सरकार ने रंग जमाया !बनाया विभाग हजार और हर विभाग में बैठा दिए कुत्ते चार !कुत्ते =सरकार ने इनाम में , जिन आँख वालो के आँख फुड़वाए थे !उन्हें कुत्ता बना दिया , जो कि सरकार के वफादार थे!
जनता भारी आर्थिक बोझ में दब गई !जनता में बदहाली छा गई !सरकार फिर घबराई !
उन्होंने एक योजना बनाई -उन्होंने शुरू करवाया ,पिसाई का काम !अब जनता पिसती है ,कुत्ते खाते है !
पढ़ने के लिए धन्यवाद !और गलती के लिए क्षमा मांगता हूँ ! धन्यवाद
संजय कुमार