राजनीति
आरक्षण का विचार एक समाधान था, पर अब इससे बड़ी समस्या कहीं नहीं । परिस्तिथियां बदलती है, समस्या और समाधान भी । उपस्थानिक जड़े काटने का मतलब नहीं होगा । हमें मूल पर कार्य करना होगा । इस विषय की चर्चा बाद में भी हो सकती हैं ।

हमें विश्व से राजनीति नामक विशाल समस्या का निराकरण करना होगा, क्योंकि राजनीति तोडती हैं । जिस प्रमुख को राज करना है , वह तोड़ देते है, हम टूट कर कुछ नहीं हो सकते हैं ।
और फिर पतन की गहराई में हम चल दिए है, तो हमें फिर कुछ न सोच, कहानी जल्दी समाप्त कर दें ।
हमें विशाल हृदय बनाना होगा, हमें कर्मठ होना होगा, और हम बाह्य रूप से समाप्त हो भी गए तो हम नित्य, शाश्वत, अनादि रहेगें ।
जनसँख्या,बेरोजगारी,प्रदूष्ण कोई समस्या नहीं हैं । अगर हम, हम हो जाये । परन्तु हम होना ही समस्त समस्याओं का एक मात्र समाधान हैं ।
एक प्रयोग मात्र एक मिनिट तक सब ईमानदार हो जाए, तो हमें विकसित होने में ज्यादा इंतजार की आवश्यकता नहीं होगी ।
नकल समाधान नहीं हैं । हमें मार्ग स्वयं चुनना होगा ।
समय रुकता नहीं, अत: जीवन में अवरोध बर्दाश्त नहीं,पर लय बिना जीना कुछ नहीं । जो दिख नहीं सकता उसे देखना, जिसे सुना ही नहीं उसे सुनना, अज्ञात को महसूस करना, उसी के साथ जीना ,उसी में एका हो जाना । फिर क्या विच्छेद ? क्या एका ? आनन्द और समाधि।
मृत हुआ है, मानव ।
अब संस्कृति कौन लाएगा।
नैतिकता के ज्ञान का वाचनालय, किसके द्वारा वाचा जाएगा ।।
हे प्रलयकारी तंद्रा में कब तक मौज उठाएगा ।
धीरे - धीरे तेरा सुख तुझे निगलते जाएगा ।।
क्यों लाशों के साथ सोता है,
क्यों लाशों के साथ जगता है,
क्यों लाशों में तू जीता है, क्यों लाशों में तू जीता है।।
पढ़ने के लिए धन्यवाद, गलती के क्षमा करें ।
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