सोमवार, 27 जुलाई 2015

a.b.c-2

    अ. ब.स -२ 

अब वहा जनता पिसती हैऔर कुत्ते खाते है। यहाँ कहानी
ख़त्म होती तो भी ठीक था। क्योंकि स्थिरता तो आई ,पर नहीं समय कहाँ रुकता है। कुछ साल ऎसे ही बीत गए। जनसंख्या बढ़ी  तो सोई सरकार जगी। उन्होंने पाया कि जनता तो हो गई तीन प्रकार की। वे घबराए। 
यहाँ भाट -चारण और कुत्ते खा -खाकर मुट्टिया गए थे। चर्बी चढ़ गई थी।  एक आँख की सरकार की चर्बी क्या कम चढ़ी थी। उलटे उन्होंने तो कई माल दबा रखा था। किसे दिख रहा था ? जिसे दिख रहा था ,वह भी आँख बंद कर के बैठे थे।
 इधर बिना आँख की जनता त्रस्त थी। इस बार एक आँख वाली सरकार को डर था। कारण -और पहला  भाट -चारणऔर  कुत्ते मिलकर एक दमदार दल बनाने की तैयारी में थे। दूसरा इस समय जनता त्रस्त थी। 
चुनाव से पहले सरकार ने रंग दिखाया। एक तीर से दो निशाना बनाया। उन्होंने एक लगाये आरोप- कि   भाट -चारण और कुत्ते आप का खाते है और मुट्टिया गए  है। आप इन्ही के कारण त्रस्त है। और एक बना दी योजना -अब आप का पिसा कुछ आप को भी मिलेगा और नियम बनाकर कुछ खुराक इन की कम की जाए गी। 
जनता खुश बना दी एक आँख की सरकार।  
पढ़ने के  लिए धन्यवाद और गलती के लिए क्षमा माँगता हूँ।                   
धन्यवाद                                                                                                             संजयकुमार

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